अभी तो घर आया हूँ , मुझे रुकने दो जरा..
अभी तो घर आया हूँ , मुझे रुकने दो जरा..
मेरी माँ , मेरे भाई, मेरी बहिन , मेरे पापा से मुझे मिलने दो जरा, अभी तो घर आया हूँ , मुझे रुकने दो जरा..
इंतज़ार कर रहे थे जो मेरे गली के दोस्त , वो चाय की टपरी, वो शुक्रवार वाला मार्किट और बड़े तालाब का शोर, उसे सुनने दो जरा..अभी तो घर आया हूँ , मुझे रुकने दो जरा..
हो गया था अर्सा वो माँ के हाथ का खाना खाएं , बिना मांगे दो रोटी एक्स्ट्रा और संग म बैठके ठहाके लगये.. घरवालो क संग बैठके तारक मेहता देखने दो जरा .,
अभी तो घर आया हूँ , मुझे रुकने दो जरा..
हा आना मुकम्मल मेरा, आज नही तो कुछ दिन बाद सही,
कहानी फिर वही चाय से शुरू होगी,
प्रोजेक्ट का डिस्कशन , अप्रैज़ल की उम्मीद, कैंटीन की गपसप और कैब की ट्रैकिंग .. थोड़े दिन तुम अकेले संभाल लो न जरा..
अभी तो घर आया हूँ , मुझे रुकने दो जरा.. 🏠

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